लेबनान ब्लास्ट- 100 से ज़्यादा लोगों की मौत, हज़ारों घायल

 जुली कुमारी-


4 अगस्त को लेबनान में हुए भयानक ब्लास्ट में कम से कम 135 लोगों की जान गई तो वहीं लग-भग 5000 लोग घायल हुए।


यह धमाका 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट की वजह से हुआ जिसे असुरक्षित तरीके से बेरूत पोर्ट के पास एक गोदाम में रखा गया था। इस घटना को मद्देनजर रखते हुए राजधानी बेरूत में दो सप्ताह की इमरजेंसी घोषित कर दी गयी है।


अमोनियम नाइट्रेट एक तरह का गंधहीन केमिकल पदार्थ है जिसे अलग-अलग चीज़ों में इस्तेमाल किया जाता है। मुख्य तौर पर इसका इस्तेमाल खेती में उर्वरक और खनन में विस्फोटक के रूप में किया जाता है। ज्वलनशील होने के कारण इसे रखने में बेहद सावधानी बरतनी होती है साथ ही कई ज़रूरी नियमों का पालन करना होता है। खबरों के अनुसार यह पदार्थ छः साल  पहले 2013 में बेरूत पोर्ट पर एक जहाज़ से  ज़ब्त किया गया था। तब से यह वहीं गोदाम में पड़ा हुआ था।


बेरूत पोर्ट के प्रमुख और कस्टम्स प्रमुख ने स्थानीय मीडिया को जानकारी दी कि उन्होंने इस संदर्भ में न्यायपालिका को कई बार पत्र भी लिखा। उन्होंने ने माँग की थी कि या तो इसे सुरक्षित रखने के प्रबंध किए जाए या फिर बेच दिया जाए, जिससे पोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित हो। जब गोदाम में स्टोर करने का आदेश मिला तो वे इस बात को जानते थे कि सामग्री खतरनाक है, पर इतनी खतरनाक है इसका अंदाज़ा नहीं था।


पहले भी अलग-अलग समय पर अलग-अलग देशों में अमोनियम नाइट्रेट के कारण धमाके हुए हैं। 2013 में अमेरिका के टेक्सास में, 2001 में फ्रांस के टुलूज़ में और 1995 में अमेरिका के ओकलाहामा में हुए अमोनियम नाइट्रेट के धमाकों में कई लोगों की जान गई और जनजीवन प्रभावित हुआ।


लेबनान के लोगो ने धमाके को लेकर सरकार से नाराज़गी जताई है। उनका मानना है कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता से हादसे को टाला जा सकता था।


कोरोना में पहले से चरमराई लेबनान की स्वास्थ्य व्यवस्था की इस धमाके ने कमर तोड़ कर रख दी है। एमेन्सटी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने आशंका जताई है कि लेबनानी न्यायापालिका अपने दम पर एक विश्वनीय और पारदर्शी जांच कर पाने में सक्षम है।


लेबनान सरकार ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर राहत कार्य में जुटी हुई है।

Comments